ज़िन्दगी है तो बहरहाल बसर भी होगी शाम आई है तो आने दो सहर भी होगी -- मुईन अहसन जज़्बी मुईन अहसन जज़्बी ज़िन्दगी: उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले में मुबारकपुर नाम का एक कस्बा है यहीं पर 1912 ई० में मुईन अहसन जज़्बी की पैदाइश हुई थी. आप को शुरू ही से माली बदहाली का सामना करना पड़ा, और सौतेली मां का सुलूक भी उन से बिल्कुल भी अच्छा नहीं था. जिस की वजह से वह उदास रहा करते थे. फिर अपनी निजी ज़िंदगी से ध्यान हटा कर आपने उर्दू शायरी की तरफ ध्यान लगाया और उर्दू अदब की मशहूर हस्तियों के काम को पढ़ने लगे. आप को शेर व शायरी का फ़न ख़़ुदा ने तोहफे में दिया था. पढ़ते पढ़ते आप नौउम्री में ही शेर कहने लगे और शायरी लिखना शुरू कर दिया. 1929 ई० में आप ने हाई स्कूल की तालीम मुकम्मल की और इसके बद सैंट जान कॉलेज आगरा से इंटरमीडिएट की तालीम मुकम्मल कर लिया. फिर जज़्बी ने दिल्ली के ऐंग्लो अरबी कॉलेज में दाख़िला लिया और यहीं से आ...
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