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Moeen Ahsan Jazbi: The Shayar with a lot of emotions (in Hindi)

ज़िन्दगी है तो बहरहाल बसर भी होगी शाम आई है तो आने दो सहर भी होगी                         -- मुईन  अहसन जज़्बी मुईन अहसन जज़्बी ज़िन्दगी:           उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले में मुबारकपुर नाम का एक कस्बा है यहीं पर 1912 ई० में मुईन  अहसन जज़्बी  की पैदाइश हुई थी. आप को शुरू ही से माली बदहाली का सामना करना पड़ा, और सौतेली मां का सुलूक भी उन से बिल्कुल भी अच्छा नहीं था. जिस की वजह से वह उदास रहा करते थे. फिर अपनी निजी ज़िंदगी से ध्यान हटा कर आपने उर्दू शायरी की तरफ ध्यान लगाया और उर्दू अदब की मशहूर हस्तियों के काम को पढ़ने लगे. आप को शेर व शायरी का फ़न ख़़ुदा ने तोहफे में दिया था. पढ़ते पढ़ते आप नौउम्री में ही शेर कहने लगे और शायरी लिखना शुरू कर दिया. 1929 ई० में आप ने हाई स्कूल की तालीम मुकम्मल की और इसके बद सैंट जान कॉलेज आगरा से इंटरमीडिएट की तालीम मुकम्मल कर लिया. फिर  जज़्बी  ने दिल्ली के ऐंग्लो अरबी कॉलेज में दाख़िला लिया और यहीं से आ...

Daagh Dehelvi: The Shayar of Romance (in Urdu)

 شبِ وصال ہے گل کر دو  ان  چراغوں  کو  خوشی کی بزم میں کیا کام  جلنے  والوں کا                                     - داغ داغؔ دہلوی زندگی:      نواب مرزا خان داغ کا پورا نام نواب مرزا خان اور تخلص داغ ہے۔ 25 مئ 1831ء کو آپ کی پیدائش دہلی کے چاندنی چوک علاقے کی گلی استاد باغ میں ہوئی۔ دہلی میں پیدا ہونے کی وجہ سے داغ دہلوی کے نام سے مشہور ہوئے۔ آپ کے اجداد اٹھارویں صدی میں سمرقند سے ہندوستان آکر آباد ہوئے تھے۔ آپ کے والد  نواب شمس الدین خان صاحب جو فیروزپور جھرکا کے نواب تھے۔ چھ سال کی عمر میں ہی آپ کے والد صاحب  کا انتقال ہو گیا تھا۔ بعد میں آپ کی والدہ وزیر خانم نے بہادرشاہ ظفر کے بیٹے مرزا فخرو سے شادی کر لی اور پھر انہیں کے ساتھ داغ بھی شاہی قلعہ میں آکر رہنے لگے اور وہیں آپ کی پرورش ہوئی۔ بہادر شاہ ظفر اور مرزا فخرو دونوں شیخ محمد ابراہیم ذوق کے شاگرد تھے۔ لہذا داغ کو بھی ذوق سے فیض حاصل کرنے کا موقع ملا۔ داغ کی ز...

Daagh Dehelvi: Shayar of Romance (in Hindi)

- शब ए विसाल है गुल कर दो इन चिराग़ों को ख़ुशी की बज़्म में क्या काम जलने वालों का                                   - दाग़ दाग़ देहलवी ज़िन्दगी:      आप का पूरा नाम नवाब मिर्ज़ा ख़ान और तख़ल्लुस दाग़ है. 25 मई 1831 ई0 को आप का जन्म दिल्ली के चांदनी चौक इलाक़े की गली उस्ताद बाग़ में हुई थी. दिल्ली में पैदा होने की वजह से आप दाग़ देहलवी के नाम से मशहूर हुए. आप के पूर्वज अट्ठारहवीं सदी में समरकंद से हिंदुस्तान आकर बस गए थे. आप के वालिद नवाब शमसुद्दीन ख़ान साहब जो फ़िरोज़पुर झिरका के नवाब थे. छः साल की उम्र में ही आप के वालिद साहब इस दुनिया से चल बसे थे. बाद में आप की वालदा साहिबा वज़ीर ख़ानम ने बहादुर शाह ज़फ़र के बेटे मिर्ज़ा फख़रू से शादी कर ली. और फिर उन्हीं के साथ दाग़ भी शाही किले में आकर रहने लगे और वही आप की परवरिश हुई. बहादुर शाह ज़फ़र और मिर्ज़ा फ़ख़रू दोनों शेख़ मोहम्मद ज़ौक के  शागिर्द थे. लिहाज़ा दाग़ को भी ज़ौक की शागिर्दी का फ़ैज़ हासिल करने का मौक़...

Nasir Kazmi: Modern Urdu Poet (In Urdu)

- اتفاقاتِ زمانہ   بھی عجب    ہے  ناصر آج وہ دیکھ رہے ہیں جو سنا کرتے تھے ناصر -                                                  ناصر کاظمی  زند گی :       سید ناصر کاظمی دورِ جدید کے معروف شاعروں میں شمار کئے جاتے ہیں۔ شاعر کے علاوہ وہ ایک مصنف اور صحافی بھی رہے ہیں۔ جدید انکی پیدائش 8 دسمبر 1925ء کو امبالہ، پنجاب، برطانوی ہندوستان میں ہوئی تھی۔ آپ کے والد محمد سلطان کاظمی رائل انڈین آرمی میں صوبیدار میجر کے عہدے پر فائز تھے۔      والد کے پیشہ ورانہ تبادلوں کی وجہ سے آپ کا بچپن کئی شہریو میں گزرا تھا۔ شروعاتی تعلیم شملہ میو حاصل کرنے کی۔ میٹرک مسلم ہائی اسکول انبالہ سے کرنے کے بعد آگے کی تعلیم کے لئے اسلامیہ کالج لاہور میں داخلہ لیا۔ ناصر کاظمی وہاں کے ایک ہوسٹل میں رہتے تھے۔ اُنکے استادِ خاص رفیق خوار اُن سے ملنے کہ لئے اقبال ہوسٹل میں آتے رہتے تھے۔ والد انکے کمرے۔ میں شعر و ش...

Nasir Kazmi: The Modern Urdu Poetry (in Hindi)

- इत्तिफ़ाक़ात-ए-ज़माना भी अजब हैं नासिर  आज   वो  देख   रहे   हैं  जो सुना करते   थे                                 - नासिर                   नासिर काज़मी ज़िन्दगी :      सैयद नासिर रजा काज़मी आधुनिक युग के प्रसिद्ध उर्दू शायरों में से एक हैं. साथ ही वह एक पत्रकार और  लेखक भी थे. उनका जन्म 8 दिसंबर 1925 ई० को पंजाब के अंबाला शहर में हुआ था. आप के वालिद मुहम्मद सुल्तान काज़मी रॉयल इंडियन आर्मी में सूबेदार मेजर के ओहदे पर थे.      नासिर के वालिद के सरकारी मुलाज़िम होने की वजह से उनके तबादले होते रहते थे इसीलिए उनका बचपन कई शहरों में गुज़रा. प्रारंभिक शिक्षा शिमला से हासिल की.       मैट्रिक मुस्लिम हाई स्कूल अंबाला से करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए इस्लामिया कॉलेज लाहौर में दाखिला लिया. वहां आप एक हॉस्टल में रहते थे. उनके ख़ास उस्ताद रफ...

Insha Allah Khan: One of greatest Indian poet (in Urdu)

    ۔                                                انشاء اللہ خاں  انشؔاء زندگی:      سید انشاء اللہ خاں انشؔاء اپنے زمانے کے نامور شعراء میں تھے۔ آپ کے والد میر ماشااللہ خان صاحب تھے۔ جو ایک جانے مانے حکیم تھے۔ ان کے بزرگ نجف اشرف کے رہنے والے تھے جو عراق میں بغداد سے قریب 160 کیلومیٹر واقع ایک شہر ہے۔ یہ لوگ مغلیہ عہد میں وہاں سے ہندوستان  تشریف لائے۔ کئی پشتیں بادشاہوں کی سرپرستی میں گزارنے کے بعد جب مغل حکومت کا  زوال آیا تو ماشاء اللہ خان دہلی چھوڑ کر بنگال کے مرشد آباد شہر چلے گئے تھے جہاں ماشا اللہ خان کو نواب سراج الدولا نے اپنے دربار میں لے لیا۔ دسمبر 1752ء میں مرشد آباد میں ہی انشؔاء کی پیدائش ہوئی تھی۔ شاہ عالم دوم کے وقت میں انشؔاء اللہ خاں دلّی آ گئے تھے۔ 1780ء میں آپ مرزا نجف بیگ کی فوج میں شامل ہو گئے لیکن آپ کی شاعرانہ صلاحیتوں کی وجہ سے جلد ہی آپ کی پہنچ شاہی دربار تک ہو گئی۔ شاہ عالم دوم نے اُنہیں خ...

Insha Allah Khan: One of great Indian poet (in Hindi)

-               इंशा अल्लाह खां 'इंशा' जीवन :      सैयद इंशा अल्लाह खां अपने ज़माने के मशहूर शायरों में थे. आपके पिता मीर माशा अल्लाह खां थे. जो एक माहिर और जाने माने हकीम थे. उनके पुरखे नजफ अशरफ़ के रहने वाले थे जो इराक़ में बग़दाद से लगभग 160 किलोमीटर दूर स्थित एक शहर है. जो मुग़ल काल में आए थे. कई पीढ़ी मुग़ल बादशाहों की सरपरस्ती में बिताने के बाद जब मुग़ल साम्राज्य का पतन होने लगा तो माशा अल्लाह खां दिल्ली छोड़कर बंगाल के मुर्शिदाबाद शहर चले गए थे जहां माशा अल्लाह ख़ान को नवाब सिराज उद दौला ने अपने दरबार में ले लिया. दिसंबर 1752 ई० में, इंशा का जन्म मुर्शिदाबाद में ही हुआ था. मुग़ल बादशाह शाह आलम द्वितीय के समय, इंशा अल्लाह खां दिल्ली चले आए. 1780 ई० में, आप मिर्ज़ा नजफ बेग की सेना में शामिल हो गए, लेकिन जल्द ही शायराना क़ाबलियत की वजह से आपकी पहुंच शाही अदालत तक हो गई. शाह आलम द्वितीय ने उन्हें ख़ूब सम्मान दिया और जल्द ही उनकी ख्याति दूर तक फैल गई.  यहां तक उस ज़माने के  मिर्ज़ा  अज़ीम बेग जैसे शायर से उनकी...